कांंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज के सेमिनार में रांची से भाग लेने आए जियाडा व जेआआईडीसीओ के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों व नए उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है. उद्योगों की स्थापना को लेकर जमीन की समस्याओं का समाधान कराने के लिए नई पॉलिसी भी लायी गई है. उन्होंने कहा कि जियाडा 3000 एकड़ नई औद्योगिक भूमि को भी विकसित कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि झारखंड न सिर्फ खनिज के मामले में हब बने बल्कि मैन्युफैक्चरिंग हब भी बने। सीआईआई झारखंड काउंसिल की ओर से मंगलवार को बिष्टुपुर स्थित एक होटल में ‘झारखंड एट 25: लूकिंग फॉरवर्ड टू 2050’ विषय पर सेनिमार का आयोजन किया गया. इस मौके पर जियाडा के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन ने सीआईआई झारखंड की इस पहल की सराहना की कि जिसमें राज्य की विकास यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर उसके भविष्य को लेकर चर्चा की।
उन्होंने झारखंड के मजबूत संसाधन आधार के बारे में कहा कि झारखंड के पास भारत के महत्वपूर्ण खनिज मिशन (क्रिटिकल मिनरल्स मिशन) के तहत पहचाने गए 24 महत्वपूर्ण खनिजों में से लगभग 20 खनिज मौजूद हैं, जो झारखंड को आने वाले वर्षों में एक अग्रणी विनिर्माण अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है. उन्होंने कहा कि जियाडा कई नई नीतियों व विनियामक सुधारों पर काम कर रहा है, जिनमें ‘औद्योगिक क्षेत्र भूमि अधिग्रहण नीति’, ‘भूमि आवंटन नीति’, ‘संशोधित जियाडा विनियम’, व ‘संयुक्त उद्यम व सार्वजनिक-निजी भागीदारी नीति’ शामिल हैं. उन्होंने कहा कि निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से करीब 3,000 एकड़ नई औद्योगिक भूमि भी विकसित की जा रही है. उन्होंने एमएसएमई कार्यक्रम की एमएसएमई परिवर्तन योजना के तहत एमएसएमई और उद्यमियों के प्रशिक्षण व क्षमता-निर्माण के लिए चलाई जा रही पहलों पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने झारखंड में औद्योगिक विकास की गति को तेज करने के लिए के साथ सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने में अपनी गहरी रुचि व्यक्त की।
इस मौके पर सीआईआई झारखंड स्टेट काउंसिल के नए चेयरमेन दिलू पारिखर ने पिछले 25 सालों में झारखंड में आए बड़े बदलावों पर रोशनी डाली. उन्होंने बताया कि कैसे झारखंड, जो पहले मुख्य रूप से अपने खनिज संपदा के लिए जाना जाता था, अब मैन्युफैक्चरिंग व औद्योगिक गतिविधियों का एक अहम केन्द्र बन गया है. उन्होंने कहा कि यह प्रगति उद्योग, नीति निर्माताओं और समुदायों के मिले-जुले प्रयासों का नतीजा है. 2050 की ओर देखते हुए, उन्होंने एक ज़्यादा मज़बूत अर्थव्यवस्था बनाने के लिए संतुलित और टिकाऊ विकास, उद्योग और संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल, और इनोवेशन, स्टार्टअप्स व एमएसएमई इकोसिस्टम को ज़्यादा समर्थन देने की जरूरत पर जोर दिया।
झारखंड में देश का करीब 40 प्रतिशत खनिज भंडार: रामम
टाटा स्टील के वाइस प्रेसीडेंट कॉरपोरेट सर्विसेज व सीआईआई झारखंड स्टेट काउंसिल के नए वाइस चेयरमैन डी बी सुन्दर रामम ने झारखंड की मजबूत औद्योगिक नींव पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा किइस राज्य में भारत के लगभग 40 प्रतिशत खनिज भंडार मौजूद हैं और यह खनन, स्टील, ऑटोमोबाइल व एमएसएमई सेक्टर में अहम भूमिका निभाता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और टिकाऊ विकास की पहलें खासतौर पर जमशेदपुर के स्टील प्लांट्स की ओर से कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयास इस क्षेत्र के औद्योगिक विकास को और मज़बूत बना रही हैं. उन्होंने राज्य में कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता को स्वीकार करते हुए कहा कि खदानों को चालू करना और उद्योग-अनुकूल शासन व्यवस्था को मज़बूत बनाना, रोजग़ार पैदा करने और झारखंड को भारत के शीर्ष पां राज्यों में शामिल करने में अहम भूमिका निभाएगा।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में हो रहे तेजी से बदलाव: अनुराग
टाटा मोटर्स के प्लांट हेड अनुराग छारिया ने कहा कि ऑटोमोटिव सेक्टर में इलेक्ट्रिक वाहनों, ऑटोमेशन व स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग को अपनाने के साथ-साथ तेजी से बदलाव आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि डेटा एनालिटिक्स, डिजिटलीकरण और उन्नत स्वचालन जैसी तकनीकें फ़ैक्टरी के कामकाज को बदल रही हैं, जिससे कार्यक्षमता, गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार हो रहा है और ये झारखंड में विनिर्माण के भविष्य को आकार देने में एक अहम भूमिका निभाएंगी।
