
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली का पहला एकीकृत वायु ड्रॉप परीक्षण (IADT-01) सफलतापूर्वक पूरा करके अपने गगनयान मिशन के लिए एक बड़ी सफलता हासिल की है। भारतीय वायु सेना, DRDO, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के सहयोग से किया गया यह परीक्षण, पुनः प्रवेश के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
इसरो के अनुसार, इस प्रदर्शन ने पैराशूट प्रणाली के संपूर्ण प्रदर्शन की पुष्टि की है जो लैंडिंग से पहले क्रू मॉड्यूल को धीमा कर देगा। इस वर्ष दिसंबर में होने वाली पहली मानवरहित गगनयान उड़ान से पहले यह परीक्षण एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा कि गगनयान कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है और लगभग 80 प्रतिशत आवश्यक परीक्षण पहले ही पूरे हो चुके हैं। दिसंबर में होने वाले आगामी G1 मिशन में अर्ध-मानव रोबोट व्योममित्र शामिल होगा, जो भारत की पहली मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान का अग्रदूत होगा।
सरकार ने भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें 2027 तक मानवयुक्त गगनयान उड़ान, 2028 में चंद्रयान-4, शुक्र मिशन और 2035 तक भारत अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना शामिल है। भारत का लक्ष्य 2040 तक चंद्रमा पर एक अंतरिक्ष यात्री को भेजना भी है।