
रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल ने कहा है कि भविष्य में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा। एसएंडपी के मुताबिक अगले तीन साल में भारत की जीडीपी औसतन 6.8 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ेगी। एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि इस साल में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.5 प्रतिशत रहेगी, जो वैश्विक मंदी के बीच उभरते बाजारों के अन्य देशों से बेहतर है।
एसएंडपी ग्लोबल के मुताबिक, भारत राजकोषीय घाटे को कम करने पर जोर दे रहा है और यह सरकार की स्थायी व संतुलित वित्तीय नीतियों के प्रति राजनीतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, बुनियादी ढांचे के विकास पर भी जोर बरकरार है। एजेंसी ने बताया कि पिछले 56 सालों में सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और बजट में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) का हिस्सा बढ़ा है। वहीं केंद्रीय सरकार का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) 2026 तक 11.2 ट्रिलियन रुपये (जीडीपी का 3.1 प्रतिशत) पहुंचने का अनुमान है, जो एक दशक पहले 2 प्रतिशत था। वहीं राज्यों के पूंजीगत खर्च को मिलाकर कुल सार्वजनिक निवेश जीडीपी के लगभग 5.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
एजेंसी का मानना है कि भारत में बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी में सुधार लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि में आ रही रुकावटों को दूर करेगा। मौद्रिक नीति में महंगाई लक्ष्य आधारित सुधार ने भी अच्छे नतीजे दिए हैं। एक दशक पहले, 2008 से 2014 के बीच, भारत में महंगाई कई बार दो अंकों में पहुंची थी, लेकिन पिछले तीन साल में वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति संकट के बावजूद खुदरा महंगाई (CPI) औसतन 5.5 प्रतिशत रही है। हाल के महीनों में महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2-6 प्रतिशत के लक्ष्य दायरे के निचले स्तर पर बनी रही। एसएंडपी के अनुसार, घरेलू पूंजी बाजार और स्थिर मौद्रिक माहौल भारत की विकास गति को आने वाले वर्षों में सहारा देंगे।