भारत में किकबॉक्सिंग को पेशेवर खेल के रूप में नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘किकबॉक्सिंग सुपर लीग’ (केएसएल) की आधिकारिक शुरुआत दिल्ली में की गई। यह पहल वाको (WAKO) इंडिया नेशनल चैंपियनशिप के दौरान सामने आई और इसे देश की पहली सुव्यवस्थित प्रोफेशनल किकबॉक्सिंग लीग माना जा रहा है।
लॉन्च कार्यक्रम में खेल जगत से जुड़े अधिकारी, कोच, खिलाड़ी और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। लीग का उद्देश्य किकबॉक्सिंग को संगठित ढांचे में लाना, खिलाड़ियों को प्रोफेशनल अवसर देना और ग्रासरूट स्तर से लेकर एलीट स्तर तक स्पष्ट प्रगति का मार्ग तैयार करना है।
KSL के पहले सीजन में आठ फ्रेंचाइज़ी टीमें भाग लेंगी, जिन्हें ‘वॉरियर क्लान’ नाम दिया गया है। हर टीम में 34 फाइटर शामिल होंगे। लीग ने पुरुष और महिला खिलाड़ियों की भागीदारी का अनुपात 60:40 रखा है, जिससे महिला खिलाड़ियों को भी पर्याप्त अवसर मिल सकें।
सीज़न के अंत में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी या खिलाड़ियों को कुल मिलाकर एक करोड़ रुपये तक का ‘मेगा परफॉर्मेंस अवॉर्ड’ देने की भी घोषणा की गई है।
लीग के सह-संस्थापक अजय अडलखा ने कहा कि KSL को मजबूत प्रशासनिक ढांचे, पारदर्शी प्रक्रियाओं और टिकाऊ आर्थिक मॉडल के साथ विकसित किया जा रहा है। उनका लक्ष्य भारतीय किकबॉक्सिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप मंच देना है। खेल मार्केटिंग और ब्रांडिंग में लंबा अनुभव रखने वाले अडलखा किकबॉक्सिंग को मुख्यधारा का खेल बनाने पर जोर दे रहे हैं।
पहला सीज़न 16 दिनों की विंडो में आयोजित होगा, जिसमें कुल 238 मुकाबले कराए जाएंगे। करीब 20 प्रतिशत खिलाड़ी विदेशी पेशेवर होंगे, जिससे प्रतियोगिता का स्तर और ऊंचा होने की उम्मीद है।
खिलाड़ियों का चयन ओपन रजिस्ट्रेशन, देशव्यापी ट्रायल, चयन शिविर और फिर ऑक्शन प्रक्रिया के जरिए होगा। इसके बाद फाइटरों को टीमों से अनुबंधित किया जाएगा।
किकबॉक्सिंग दुनिया के तेजी से बढ़ते कॉम्बैट स्पोर्ट्स में गिनी जाती है और 150 से अधिक देशों में खेली जाती है। इसका अंतरराष्ट्रीय संचालन वाको (WAKO) करता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) की मान्यता प्राप्त है।
KSL के आगमन से उम्मीद की जा रही है कि भारत में किकबॉक्सिंग को नया मंच मिलेगा और उभरते खिलाड़ियों को करियर बनाने का प्रोफेशनल रास्ता भी।
