भारतीय रेल केवल परिवहन का माध्यम नहीं है, बल्कि भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवनरेखा भी है। समय के साथ भारतीय रेल ने खुद को निरंतर आधुनिक बनाया है, चाहे वह तेज़ रफ्तार ट्रेनें हों, उन्नत सुरक्षा प्रणालियाँ हों या यात्री सुविधाओं का विस्तार। इसी क्रम में अब एक नई और अनूठी पहल की गई है, जिसने रेल यात्रा और अधिक यादगार बनेगी। वंदे भारत ट्रेनों में क्षेत्रीय व्यंजनों की शुरुआत भारतीय रेल का ऐसा कदम है, जो न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाता है, बल्कि भारत की समृद्ध संस्कृति को भी सम्मान देता है।
यात्री अनुभव को केंद्र में रखती नई सोच
आज का यात्री केवल समय पर गंतव्य तक पहुँचना ही नहीं चाहता, बल्कि यात्रा के दौरान आराम, गुणवत्ता और अनुभव को भी महत्व देता है। इसी सोच के तहत भारतीय रेल ने वंदे भारत ट्रेनों में क्षेत्रीय, पारंपरिक और प्रामाणिक भोजन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। अब यात्री अपनी सीट पर बैठे-बैठे देश के अलग-अलग राज्यों के विशिष्ट स्वादों का आनंद ले सकते हैं। यह पहल बताती है कि भारतीय रेल अब “सिर्फ यात्रा” से आगे बढ़कर “अनुभवात्मक यात्रा” की दिशा में अग्रसर है।
भारत की विविधता में एकता का आधार बन रही है भारतीय रेल
भारत विविधताओं का देश है—भाषा, पहनावा, परंपराएँ और सबसे बढ़कर भोजन। हर राज्य, हर क्षेत्र का अपना विशिष्ट स्वाद और पहचान है। वंदे भारत ट्रेनों में क्षेत्रीय व्यंजन परोसने की यह पहल इसी विविधता को एक मंच पर लाती है। महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, केरल, बिहार, जम्मू और कश्मीर जैसे राज्यों के प्रसिद्ध व्यंजन अब वंदे भारत ट्रेनों में उपलब्ध हैं। इससे न केवल स्थानीय यात्रियों को अपने घर जैसा स्वाद मिलता है, बल्कि अन्य राज्यों के यात्रियों को भी देश की संस्कृतियों से परिचित होने का अवसर मिलता है।
पश्चिम बंगाल और बिहार: परंपरा और भावनाओं का स्वाद
पश्चिम बंगाल का भोजन अपने विशिष्ट मसालों और धीमी आंच पर पकाए गए व्यंजनों के लिए जाना जाता है। राउरकेला–हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस में कोषा पनीर और हावड़ा–पुरी वंदे भारत एक्सप्रेस में आलू पोतोल भाजा यात्रियों को बंगाल की पारंपरिक रसोई से जोड़ते हैं।
बिहार की धरती से जुड़े चंपारण पनीर (पटना–रांची) और चंपारण चिकन (पटना–हावड़ा) जैसे व्यंजन ग्रामीण परंपरा और मिट्टी की खुशबू लिए हुए हैं। इन व्यंजनों के माध्यम से बिहार की सरलता, स्वाद और सांस्कृतिक पहचान झलकती है।
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के पारंपरिक स्वाद
महाराष्ट्र का भोजन अपनी सादगी और पौष्टिकता के लिए जाना जाता है। नागपुर–सिकंदराबाद वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को कांदा पोहा परोसा जा रहा है, जो महाराष्ट्र की सुबह की पहचान है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध व्यंजन आंध्रा कोडी कुरा और डोंडाकाया करम पोडी फ्राय दक्षिण भारतीय मसालों के स्वाद को दर्शाते हैं। वहीं CSMT–मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस में मसाला उपमा यात्रियों को हल्का, पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प प्रदान करता है।
गुजरात और ओडिशा: सादगी में स्वाद
गुजराती भोजन संतुलित स्वाद के लिए जाना जाता है। मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस में मेथी थेपला और साबरमती–वेरावल वंदे भारत एक्सप्रेस में मसाला लौकी परोसी जा रही है। ये व्यंजन न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि स्थानीय कृषि और परंपरा से भी जुड़े हुए हैं।
ओडिशा के यात्रियों और फूड लवर्स के लिए हावड़ा–पुरी वंदे भारत एक्सप्रेस में आलू फूलगोभी उपलब्ध है, जो ओडिशा की घरेलू रसोई का प्रतिनिधित्व करता है—सादा, संतुलित और आत्मीय।
केरल की समृद्ध पारंपरिक थाली
केरल का भोजन अपने नारियल-आधारित स्वाद, मसालों और पारंपरिक तरीकों के लिए प्रसिद्ध है। कासरगोड–तिरुवनंतपुरम और मंगलुरु–तिरुवनंतपुरम वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों को एक संपूर्ण केरलियन अनुभव मिलता है। इस थाली में सफेद चावल, पचकक्का चेरुपयार मेझुक्कू पेराटी, कडला करी, केरल पराठा, सादा दही, पालडा पायसम और अप्पम शामिल हैं। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि केरल की समृद्ध संस्कृति का स्वाद है, जो यात्रा को विशेष बना देता है।
डोगरी और कश्मीरी व्यंजन: पहाड़ों का खास स्वाद
जम्मू और कश्मीर का भोजन अपनी विशिष्टता और सौम्यता के लिए प्रसिद्ध है। डोगरी पाकशैली के अंबल कद्दू और जम्मू चना मसाला यात्रियों को जम्मू क्षेत्र के पारंपरिक स्वाद से परिचित कराते हैं। वहीं कश्मीर की पहचान टमाटर चमन और केसर फिरनी श्री माता वैष्णो देवी कटरा–श्रीनगर मार्ग की वंदे भारत ट्रेनों में परोसी जा रही है। ये व्यंजन न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इससे स्थानीय उत्पादकों, रसोइयों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा मिलता है। क्षेत्रीय व्यंजनों की मांग बढ़ने से स्थानीय सामग्री और पारंपरिक पकाने की विधियों को प्रोत्साहन मिलता है। इससे “वोकल फॉर लोकल” की भावना को भी मजबूती मिलती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
यात्रा जो यादगार बन जाए
वंदे भारत ट्रेनों में क्षेत्रीय भोजन की शुरुआत यह दर्शाती है कि भारतीय रेल अब यात्रियों की भावनाओं, उनकी संस्कृति और उनकी जड़ों को भी समझ रही है। भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि यादों, परंपराओं और अपनत्व का माध्यम होता है। जब कोई यात्री अपनी यात्रा के दौरान अपने राज्य का पसंदीदा व्यंजन चखता है, तो वह खुद को घर के और करीब महसूस करता है।
भारतीय रेल की यह पहल रेल यात्रा को एक नए आयाम पर ले जाती है। यह सिर्फ आधुनिक ट्रेन या तेज़ रफ्तार का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की एकता में विविधता का जीवंत उदाहरण है। क्षेत्रीय स्वादों के साथ वंदे भारत की यात्रा अब केवल मंज़िल तक पहुँचने का साधन नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव बन चुकी है, जो यात्रियों के दिल और स्वाद—दोनों में लंबे समय तक बस जाता है।
