April 11, 2026
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सीएसआईआर-एनएमएल में आयोजित आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘अभियांत्रिकीय उपकरणों की शेष आयु आकलन (आरएलए-2026)’ का शुक्रवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ. समापन सत्र में विशेषज्ञों ने औद्योगिक उपकरणों के सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती संचालन के लिए उन्नत तकनीकों के उपयोग पर बल दिया. संगोष्ठी के दौरान बॉयलर, टर्बाइन, पाइपलाइन व रिफाइनरी उपकरणों जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक ढांचों की जीवन अवधि के आकलन पर गहन मंथन हुआ. विशेषज्ञों ने कहा कि सटीक जीवन पूर्वानुमान के लिए नॉन-डिस्ट्रक्टिव इवैल्यूएशन (एनडीए), माइक्रोस्ट्रक्चरल विश्लेषण व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा तकनीकों का समेकित उपयोग आवश्यक है।

सीएसआईआर-एनएमएल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में तकनीकी सत्रों में क्रीप और स्ट्रेस रप्चर आधारित जीवन मूल्यांकन, जंग प्रबंधन व जोखिम-आधारित निरीक्षण, उन्नत आरएलए कार्यप्रणालियों सहित विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी. प्रतिभागियों ने प्रयोगशाला की अत्याधुनिक सुविधाओं का भी अवलोकन किया. समापन सत्र में निदेशक एनएमएल के निदेशक डा. संदीप घोष चौधरी ने प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए संस्थान की अनुसंधान प्रतिबद्धता दोहरायी. आयोजन समिति के अध्यक्ष डा. जितेंद्र कुमार साहू, संयोजक डा. सुमंत बागुई व डॉ. कृष्णा गुगुलोथ ने कार्यक्रम की सफलता के लिए आभार जताया।

पैनल डिस्कशन में अहम मामले पर मंथन

आरएलए- 2026 के दूसरे दिन राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्लांट घटकों की आयु वृद्धि के लिए अनुसंधान व विकास आधारित इंजीनियरिंग विषय पर पैनल चर्चा हुई, जिसकी अध्यक्षता डा. जीतेन्द्र कुमार साहू ने की. पैनल में सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डा. संदीप घोष चौधरी,  डा. के के साहू, ए सामंता, डा. एस के नाथ व के सतीश शामिल रहे.इ इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान में बॉयलर की आरएलए जांच 5-6 वर्षों के अंतराल पर होती है, लेकिन कई बार निरीक्षण के कुछ ही महीनों बाद विफलताएं सामने आ जाती हैं. इस पर उच्च गुणवत्ता वाली रिपोर्टिंग व निरीक्षण की आवृत्ति बढ़ाने की जरूरत है. एनडीटी तकनीकों में ऑटोमेशन के बावजूद गुणवत्ता से समझौता नहीं करने व आरएलए सॉफ्टवेयर में डेटा की शुद्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

पैनल डिस्कशन में भविष्य की दिशा पर सुझाव

पैनल में सामग्री चयन, हार्ड कोटिंग्स और आरएंडडी को मजबूत करने की जरूरत बतायी गई. विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान हार्ड कोटिंग तकनीकें कमजोर बॉन्ड स्ट्रेंथ के कारण अल्प अवधि में विफल हो जाती हैं. कौशल अंतर को दूर करने के लिए आरएलए सर्टिफिकेट कोर्स और इंडस्ट्रियल पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया. एसीएसआईआर के संचालित आईपीएचडी कार्यक्रम को उद्योग की वास्तविक समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

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