एक हालिया चिकित्सा शोध में यह चेतावनी दी गई है कि कैंसर से जूझ रहे मरीजों में हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस शोध के अनुसार, शरीर में होने वाली पुरानी सूजन (इन्फ्लेमेशन) और रक्त के थक्के जमने की असामान्य प्रक्रियाएं इसके पीछे के मुख्य कारण हैं। कैंसर के उपचार के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली कुछ दवाएं और कीमोथेरेपी भी हृदय की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे मरीजों में दिल का दौरा या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं की संभावना अधिक हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर का इलाज केवल ट्यूमर को ठीक करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें हृदय स्वास्थ्य की निगरानी भी शामिल होनी चाहिए।
डॉक्टरों ने सलाह दी है कि कैंसर के मरीजों को अपने उपचार के दौरान और उसके बाद भी नियमित रूप से कार्डियोलॉजिस्ट के संपर्क में रहना चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और समय पर जांच के माध्यम से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है। यह रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि शुरुआती पहचान और उचित एहतियात बरतने से कैंसर सर्वाइवर्स की जीवन प्रत्याशा और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। भविष्य में बेहतर परिणामों के लिए ऑन्कोलॉजी (कैंसर विज्ञान) और कार्डियोलॉजी (हृदय विज्ञान) के विशेषज्ञों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है ताकि मरीज के समग्र स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके।
