हालिया शोध और स्वास्थ्य आंकड़ों से यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि ५० वर्ष से कम आयु के युवाओं में आंत के कैंसर (बोवेल कैंसर) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे मुख्य कारण आधुनिक जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन और शारीरिक सक्रियता में कमी है। हालांकि आनुवंशिक कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं, लेकिन कम उम्र में इस बीमारी का पता चलना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पाचन संबंधी समस्याओं समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
चिकित्सकों का कहना है कि युवा अपनी आदतों में छोटे बदलाव करके इस गंभीर बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। आहार में अधिक फाइबर, ताजे फल और सब्जियों को शामिल करना, लाल मांस (रेड मीट) का सेवन कम करना और नियमित व्यायाम करना इसके बचाव के प्रभावी तरीके हैं। इसके अलावा, वजन पर नियंत्रण रखना और शराब व धूम्रपान से दूरी बनाना भी अत्यंत आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि मल त्याग की आदतों में बदलाव या पेट में लगातार दर्द जैसे लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए ताकि शुरुआती चरण में ही इसका उपचार संभव हो सके।
