केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को संसद में रेल मंत्रालय के अनुदान मांग पर चर्चा करते हुए कहा कि बजटीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जो पहले करीब 25,000 से 30,000 करोड़ से बढक़र वर्तमान वित्तीय वर्ष में करीब 2.78 लाख करोड़ हो गई. इससे पूरे वर्ष निरंतर निर्णय लेने की प्रक्रिया संभव हुई, जिसमें परियोजनाओं की स्वीकृति, नई ट्रेन सेवाएं शुरू करना और नई तकनीकों को अपनाना शामिल है।
अवसंरचना विस्तार और क्षमता वृद्धि
केन्द्रीय रेलमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में रेलवे अवसंरचना में व्यापक विस्तार हुआ है. माल ढुलाई 2013-14 में करीब 1,055 मिलियन टन से बढक़र लगभग 1,650 मिलियन टन हो गई है, जिससे भारतीय रेल विश्व की दूसरी सबसे बड़ी माल परिवहन प्रणाली बन गई है. पटरियों का निर्माण करीब 15,000 किमी से बढक़र 35,000 किमी तक पहुंच गया है. विद्युतीकरण भी तेजी से बढ़ा है, जो लगभग 5,200 किमी से बढक़र 47,000 किमी तक पहुंच गया है, जिससे नेटवर्क का 99त्न से अधिक हिस्सा विद्युतीकृत हो चुका है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा अवसंरचना में भी सुधार हुआ है, जहां रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज की संख्या लगभग 4,000 से बढक़र 14,000 हो गई है. ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1,500 किमी से बढक़र 4,000 किमी से अधिक हो गई है. इसके अलावा करीब 48,000 एलएचबी कोच जोड़े गए हैं, लोकोमोटिव उत्पादन लगभग 12,000 इकाइयों तक पहुंच गया है और वैगन की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई।
उन्होंने कहा कि 2014 तक सिर्फ करीब 125 किलोमीटर सुरंगों का निर्माण हुआ था, जबकि उसके बाद 486 किलोमीटर अतिरिक्त सुरंगें बनायी गई हैं, जिससे पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर जैसे कठिन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर हुई है. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जहां लगभग 2,800 किमी पूरा हो चुका है और प्रतिदिन लगभग 480 मालगाडय़िां संचालित हो रही हैं।
संचालन और नेटवर्क विस्तार
उन्होंने कहा कि भारतीय रेल वर्तमान में प्रतिदिन करीब 25,571 ट्रेनों का संचालन कर रही है. रेलवे नेटवर्क करीब 1,37,522 रूट किलोमीटर तक विस्तारित हो चुका है, कुल बेड़े में करीब 3.86 लाख वैगन और लगभग 98,000 कोच शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. व्यवस्थित विश्लेषण और सुधारात्मक उपायों के कारण रेलवे दुर्घटनाओं में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है। सुरक्षा कार्यों पर करीब 1.2 लाख करोड़ का निवेश किया गया है।
स्वदेशी विकसित कवच भी लागू
स्वदेशी विकसित ‘कवच’ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगभग 3,000 किमी नेटवर्क पर लागू किया जा चुका है, जबकि 20,000 किमी पर कार्य प्रगति पर है और लगभग 8,000 लोकोमोटिव में इसे लगाने की योजना है।
उन्होंने कहा कि रेलवे आम जनता के लिए किफायती यात्रा सुनिश्चित कर रहा है, करीब 70 प्रतिशत कोच सामान्य और स्लीपर श्रेणी के हैं. 2024-25 में करीब 1,250 व 2025 -26 में लगभग 860 सामान्य कोच जोड़े गए. उन्होंने कहा कि रेलवे प्रति वर्ष लगभग ?60,000 करोड़ की यात्री सब्सिडी प्रदान करता है, जिससे प्रत्येक यात्री को औसतन 45त्न की छूट मिलती है।
नई ट्रेन सेवाएं
वर्तमान में 160 से अधिक वंदे भारत ट्रेनें और 60 अमृत भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं. 133 अमृत भारत ट्रेनों का निर्माण जारी है. पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन हावड़ा और कामाख्या के बीच शुरू की गई है. इसके अलावा, मुंबई के लिए 238 नई उपनगरीय ट्रेनें व करीब 200 मेमू ट्रेनें शुरू करने की योजना है. विशेष ट्रेनों का संचालन काफी बढ़ा है. पहले जहां 2,000- 2,500 विशेष ट्रेनें चलती थीं, अब रिकॉर्ड संख्या में चलाई जा रही हैं. उन्होंने कहा कि दीवाली व छठ पूजा के दौरान करीब 12,383 विशेष ट्रेनें चलाई गईं, जबकि होली के दौरान 1,500 से अधिक ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं। 75 प्रमुख स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया भी विकसित किए जा रहे हैं।
रोजगार और भर्ती
उन्होंने कहा कि पिछले दशक में लगभग 5 लाख नौकरियां दी गई हैं और 1.43 लाख भर्तियां वर्तमान में जारी हैं। एक वार्षिक भर्ती कैलेंडर लागू किया गया है. 150 शहरों में 15 भाषाओं में परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं, जिसमें लगभग 3.6 करोड़ उम्मीदवार भाग ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया रेलवन ऐप 2.5 करोड़ से अधिक डाउनलोड पार कर चुका है और प्रतिदिन लगभग 9.5 लाख टिकट बुकिंग में सहायता करता है. पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (क्कक्रस्) को आधुनिक बनाया गया है. तत्काल टिकट प्रणाली में सुधार से बॉट और अनधिकृत सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग में कमी आई है. उन्होंने कहा कि भारतीय रेल लगभग 1,300 स्टेशनों का पुनर्विकास कर रही है, जिनमें से 180 पूरे हो चुके हैं और लगभग 500 उन्नत चरण में हैं। पश्चिम बंगाल में लगभग 40 स्टेशन पूर्णता के करीब हैं और 9 स्टेशन पूरे हो चुके हैं।
