यूजीसी कानून का पूरे देश मे विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है । इस कानून के विरोध मे आज झारखंड क्षत्रिय संघ सह सवर्ण महासभा के अध्यक्ष शम्भू नाथ सिंह ने कहा की इस कानून का हमलोग पूर्ण विरोध करते है । आने वाले दिनों मे और भी जोरदार विरोध प्रदर्शन किया जायेगा ।
आज मुख्य रूप से शंभू नाथ सिंह, ब्राह्मण समाज से कमल किशोर , डी के मिश्रा ब्रह्मर्षि समाज के अध्यक्ष राम नारायण शर्मा , कायस्थ महासभा के अजय श्रीवास्तव , चंद्रगुप्त सिंह, जिला परिषद सदस्य कविता परमार, समाजसेवी शिवशंकर सिंह , सवर्ण महासभा की प्रवक्ता मंजू सिंह सभी ने मिलकर उपायुक्त महोदय से अपनी बातों को रखा।
सभी ने एक स्वर मे विरोध किया है ।
हजारों की संख्या में सवर्णों ने विभिन्न तख्तियों, स्लोगन और नारों के माध्यम से साकची में आक्रोश मार्च निकाला। सवर्ण समुदाय ने आज आपसी एकता का परिचय देते हुए केंद्र सरकार को अपना विरोध दर्ज किया।
भारत सरकार और संबंधित मंत्रालय का ध्यान प्रस्तावित यूजीसी विधेयक 2026′ की गंभीर कमियों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। हमारे समाज मे आज डर है कि यह विधेयक न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करेगा, बल्कि छात्रों के विरुद्ध एक प्रतिशोधात्मक हथियार के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
विधेयक की मुख्य कमियां और चिंताएं निम्नलिखित हैं:
पूर्वाग्रहित ये UGC विधेयक 2026 पूरी तरह से पूर्वाग्रहित इसके उद्देश्य में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछले वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों एवं दिव्यांग जनों को शामिल किया गया है और यह माना गया है कि इन्हीं के साथ धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान, दिव्यांगता या इनमें से किसी एक के आधार पर भेदभाव या असमानता की जाती है इसका अर्थ यह हुआ कि इन्हें छोड़कर जो अन्य वर्ग के छात्र आते हैं उनके साथ भेदभाव नहीं होता है या उनके साथ असमानता नहीं होती है। सामान्य वर्ग को दोषी मान लिया गया है कहीं न कहीं।
धारा 3 (1) ङ में जो भेदभाव की परिभाषा दी गई है इसके अनुसार भेदभाव का अर्थ धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान, दिव्यांगता या इनमें से किसी एक के आधार पर किसी भी हितधारक के विरुद्ध कोई भी अनुचित भेदभावपूर्ण या पक्षपात पूर्ण व्यवहार या ऐसा कोई कार्य चाहे वह स्पष्ट हो या अंतर्निहित हो। यूजीसी बिल 2012 से बिल्कुल अलग इसमें अंतर्निहित शब्द का प्रयोग किया गया जो जिसे परिभाषित करना कठिन है और इसका लाभ उठाते हुए शैक्षणिक प्रतिशोध के तहत सामान्य वर्ग के छात्र को झूठे आरोप लगा सकता है क्योंकि अंतर्निहित व्यवहार को परिभाषित करना कठिन है।
धारा 6 समता हेल्पलाइन: इसमें शिकायत कर्ता अथवा सूचक या भेदभाव की सूचना देने वाले हिट धारक की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। यह नियम अपने आप में घातक है क्योंकि कोई भी व्यक्ति अथवा छात्र किसी के खिलाफ भी कभी भी शिकायत कर सकता है और कोई छात्र राजनीति के प्रतिशोध के लिए छात्र राजनीति में ऐसा कर सकता है।
धारा 5 (7) में समता समिति में अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजन, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं का प्रतिनिधित्व होना चाहिए । कोई भी सामान्य वर्ग का छात्र इसमें नहीं होगा जब तक कि वाह खेल में, शैक्षणिक योग्यता, सह पाठ्यक्रम के प्रदर्शन के आधार पर विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में ही रह सकता है। ये भी संभव है कि उच्च शिक्षण संस्थान का प्रमुख सामान्य वर्ग के छात्र से असमानता करें लेकिन उसके लिए कोई प्रावधान नहीं है और न ही उसके लिए समिति में अनिवार्य रूप से जगह है।
दोषी साबित होने तक निर्दोष उनके विरुद्ध इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों को शिकायत होने के साथ ही दोषी मान लिया गया है ठीक पॉक्सो एक्ट की तरह जहां पीड़िता की पहचान इसलिए छुपाई जाती है क्योंकि आरोपी को उसमें निर्दोष होने तक दोषी माना जाता है। सामान्य वर्ग के छात्र विरुद्ध जघन्य अपराधी की तरह सोच रखना इस बिल को शैक्षणिक समरसता के घातक है।
झूठी शिकायत पर कोई जुर्माना नहीं पूर्व में झूठी शिकायत के लिए जुर्माना का प्रावधान था जिसे हटाकर सामान्य छात्रों के विरुद्ध यह बिल एक कवच नहीं अपितु हथियार की भाँति प्रयोग करने की स्वतंत्रता दे दी गई है।
समान समूह (Equity Squad) ये समूह कॉलेज अथवा उच्च शिक्षा संस्थान के कोने कोने पर निगरानी रखेगी और कहीं भी हो रहे भेदभाव को रोकेगी । ये समान समूह सामान्य वर्ग के छात्रों पर संदिग्ध की भांति निगरानी रखेगी ।
छात्रों के विरुद्ध दंडात्मक प्रावधान: विधेयक की कुछ धाराएं अधिकारियों को छात्रों के विरुद्ध मनमानी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की असीमित शक्ति प्रदान करती हैं। यह छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए एक ‘प्रतिशोधात्मक तंत्र’ के रूप में कार्य कर सकता है।
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर प्रहार: यह विधेयक विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वायत्तता को सीमित कर केंद्र के नियंत्रण को बढ़ाता है, जिससे स्थानीय और क्षेत्रीय शैक्षिक आवश्यकताओं की उपेक्षा होने की संभावना है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की योजनाओं से वंचित एवं संस्थान की मान्यता रद्द होने का भय समान समिति को शिकायत के 24 घंटे के अंदर कार्रवाई करनी है 15 दिन में रिपोर्ट जमा करनी है जिसकी प्रति पीड़ित को मुहैया करानी है और रिपोर्ट जमा होने के 7 दिनों के अंदर कार्य दिवसों
के भीतर आगे की कार्रवाई शुरू करेगा। हालांकि, यदि दंड नियमों के तहत कोई मामला बनता है, तो पुलिस अधिकारियों को तत्काल सूचित किया जाएगा। क्योंकि समान समिति का प्रमुख संस्थान का प्रमुख ही होंगे इसलिए उनपर दबाव होगा कि करवाई समय सीमा पर ही करें जल्दबाजी में किया गया न्याय, न्याय का दफन होना है, की तरह है और ऐसा न करने पर संस्थान को यूजीसी की योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा और उनके संस्थान की मान्यता भी रद्द हो सकती है।
जवाबदेही का अभाव: विधेयक में अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के बजाय, उन्हें अत्यधिक विवेकाधीन शक्तियां दी गई हैं, जिसका दुरुपयोग छात्र हितों के खिलाफ हो सकता है।
हमारी मांगें:
विधेयक की उन धाराओं को तुरंत हटाया जाए जो छात्रों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की शक्ति देती हैं।
शिक्षा के लोकतांत्रिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए छात्रों और शिक्षकों के साथ व्यापक परामर्श किया जाए।
उच्च शिक्षा में सरकारी वित्तपोषण और स्वायत्तता सुनिश्चित की जाए।
इसे अभी वापस लिया जाए।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस ज्ञापन को संबंधित मंत्रालय और केंद्र सरकार तहैक प्रेषित करने की कृपा करें ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।
किसी भी तरह का खिलवाड़ होने पर पूरे भारत कि जानता इसका माकूल जवाब देगी । सभी समाज से लगभग 1000 से भी अधिक लोगों ने इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज की।
आज यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
का हम सभी स्वागत करते हैं। आज के कार्यक्रम में झारखंड क्षत्रिय संघ का बहुत ही सराहनीय योगदान रहा जिसमें विभिन्न इकाइयों के अध्यक्ष, महिला अध्यक्ष, युवा कमिटी अपनी अपनी समितियों के साथ भारी संख्या में पहुंचकर विरोध का हिस्सा बनें।
अनील सिंह, विमलेश उपाध्याय, सतीश श्रीवास्तव,
क्षत्रिय संघ के युवा अध्यक्ष नीरज सिंह, प्रभाकर,
अशोक सिंह, हितैषी, बच्चा सिंह, श्याम सिंह, प्रशांत सिंह, राजकुमार सिंह, अनूप सिंह, वाई के सिंह के साथ हजारों लोग उपस्थित थें। सभी ने एक स्वर में विरोध करते हुए जरूरत पड़ने पर और भी संख्या के साथ विरोध प्रदर्शन की बात कही। डीडी त्रिपाठी जी एवं सतीश सिंह भी उपस्थित थे।
