अरका जैन यूनिवर्सिटी में ‘त्रिधारा-छऊ नृत्य महोत्सव’ का आयोजन किया गया. इस दौरान पूरा यूनिवर्सिटी परिसर लय, गति व परंपरा की त्रिधारा में सराबोर रहा. इस महोत्सव में छऊ नृत्य की सरायकेला, खरसावां व मानभूम तीनों प्रमुख शैलियों का एक साथ सशक्त और कलात्मक संगम देखने को मिला, जो अभूतपूर्व रहा. महोत्सव का उद्देश्य झारखंड की समृद्ध अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित, प्रोत्साहित और नई पीढ़ी तक पहुंचाना था। अरका जैन यूनिवर्सिटी में आयोजित महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री शशधर आचार्य थे. वे देश के लोकप्रिय छऊ कलाकार व छऊ परंपरा से जुड़े सातवें पद्मश्री पुरस्कार विजेता हैं।
उन्होंने छऊ नृत्य की तीनों शैलियों, उनकी दार्शनिक गहराई, अनुशासित प्रशिक्षण पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को गढऩे में लोक परंपराओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. कला मंदिर के सीनियर वाइस प्रेसीडेंअ व कार्यकारी समिति सदस्य बीएन षाड़ंगी ने कला मंदिर के दृष्टिकोण को साझा किया. उन्होंने कहा कि झारखंड की लोक परंपराएं केवल प्रदर्शन की विधा नहीं हैं। यहां की लोक कलाएं समुदायों में रची-बसी जीवंत प्रथाएं हैं, जो युवाओं को सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाती हैं. महोत्सव के दौरान छऊ नृत्य की तीनों शैलियों की प्रभावशाली व मनमोहक प्रस्तुतियां आकर्षण का केन्द्र रही. गुरु परमानंद नंद एवं उनकी टीम की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. उनकी टीम ने खरसावां छऊ में बिना मुखौटे के भावपूर्ण शारीरिक भाषा और ऊर्जावान शिकारी नृत्य की प्रस्तुति दी।
सुकन्या आचार्य द्वारा प्रस्तुत सरायकेला शैली छऊ में राधा-कृष्ण एवं मयूर की सजीव व कोमल प्रस्तुतियां देखने को मिलीं.इसमें शास्त्रीय सौंदर्यशास्त्र और लोक भावना का सुंदर समन्वय सराहनीय रहा. वहीं, गुरु गंभीर महतो व उनकी टीम ने मानभूम छऊ ने भारी मुखौटों और रंगीन वेशभूषा के माध्यम से युद्ध, वीरता और साहस की भावना को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया. कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन कलामंदिर की कार्यकारी समिति सदस्य फाल्गुनी रॉय ने किया. इस मौके पर यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के चेयरमैन प्रो. डा. एस एस रजी व प्रति कुलपति डा. अंगद तिवारी, कला मंदिर द सेल्युलाइड चैप्टर आर्ट फाउंडेशन (सीसीएएफ) के अध्यक्ष अमिताभ घोष, कार्यक्रम की संयोजिका उषा बारला समन्वयक डा. शाहीन फातिमा समेत अन्य छात्र व छात्राएं मौजूद थे।
